उत्पत्ति एव कार्य
प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दशक की पृष्ठभूमि में, सन् 1995 में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र की स्थापना कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय द्वारा की गई, जो उस समय देश में आपदा प्रबंधन के लिए नोडल मंत्रालय था।
केन्द्र द्वारा आपदा प्रबंधन विषय कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय से गृह मंत्रालय के अधीन हस्तानांतरित किए जाने के पश्चात् केंद्र को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के रूप में 16 अक्टूबर 2003 को विकसित किया गया | संस्थान का उद्घाटन 11 अगस्त 2004 को माननीय तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा किया गया |
संस्थान को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत एक वैधानिक संगठन का दर्जा प्राप्त है। अधिनियम की धारा 42 की उपधारा 8 के अंतर्गत संस्थान को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में “प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की योजना बनाने और उसे बढ़ावा देने, प्रलेखन करने तथा आपदा प्रबंधन नीतियों, रोकथाम तंत्रों एवं शमन उपायों से संबंधित राष्ट्रीय स्तर के सूचना आधार के विकास” के लिए उत्तरदायी बनाया गया है।
अधिनियम की धारा 42 की उपधारा 9 के अन्तर्गत संस्थान को निम्नलिखित विशिष्ट कार्य सौंपे गए हैं :-
- (अ) आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण मॉडयूल विकसित करना, अनुसन्धान एवं अभिलेखन कार्य एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना |
- (ब) आपदा प्रबंधन के सभी पहलुओं पर व्यापक मानव संसाधन विकास योजना तैयार करना और उसे लागू करना |
- (स) राष्ट्रीय स्तर की नीति बनाने में केंद्र सरकार को सहयोग करना |
- (द) हितधारकों सहित सरकारी कर्मियों के लिए प्रशिक्षण और अनुसंधान कार्यक्रमों के विकास हेतु प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों को आवश्यक सहायता प्रदान करना, तथा राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों के संकाय सदस्यों के लिए प्रशिक्षण आयोजित करना।
- (य) राज्य सरकारों एवं राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों को राज्य स्तरीय नीतियों, रणनीतियों, आपदा प्रबंधन रूपरेखा के निर्माण में सहायता प्रदान करना, तथा हितधारकों, सरकारी संस्थाओं एवं उनके अधिकारियों, नागरिक समाज के सदस्यों, कॉरपोरेट क्षेत्र एवं जनप्रतिनिधियों की क्षमता-वृद्धि के लिए राज्य सरकारों या राज्य प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा अपेक्षित किसी भी प्रकार की सहायता उपलब्ध कराना।
- (र) आपदा प्रबंधन के लिए शैक्षणिक एवं पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक सामग्री तैयार करना |
- (ल) बहु-आपदा न्यूनीकरण, तैयारी एवं प्रतिक्रिया उपायों से जुड़े हितधारकों, जिनमें कॉलेज या स्कूल के शिक्षक एवं छात्र, तकनीकी कार्मिक तथा अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल हैं, के बीच जागरूकता को बढ़ावा देना।
- (व) उपर्युक्त उद्देश्यों को बढ़ावा देने हेतु देश और विदेश में अध्ययन पाठ्यक्रमों, सम्मेलनों, व्याख्यानों तथा संगोष्ठियों का आयोजन, संचालन और सुविधा प्रदान करना।
- (श) उपर्युक्त उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु पत्रिकाओं, शोध पत्रों एवं पुस्तकों का प्रकाशन करना तथा पुस्तकालयों की स्थापना एवं उसकी देखभाल करना।
- (ष) उपर्युक्त उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सहायक या उससे संबद्ध सभी विधिसम्मत कार्य करना।
- (स) ऐसा कोई अन्य कार्य करना, जो केंद्र सरकार द्वारा उसे सौंपा जाए।
साइट का विकास एवं रखरखाव आईटी अनुभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) द्वारा किया गया है।
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